एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स : वायु प्रदूषण से भारतीयों की उम्र घट रही

पूरी दुनिया खासकर विकासशील और औद्योगिकीकरण के रास्ते पर चल रहे देशों में वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन कर उभरा है। वायु को प्रदूषित करने वाली गैसों में कार्बन डायक्साइड, सल्फर तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड के साथ-साथ हाइड्रोजन सल्फाइड, हाइड्रोकार्बन गैसें और मानव निर्मित गैस क्लोरोफ्लोरो कार्बन मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं। उद्योगों व कारखानों की चिमनियों, शहरीकरण के कारण पैदा हो रहे कचड़े व अपशिष्ट और निजी व सार्वजनिक वाहनों के धुएं तथा घरेलू उपयोग में लकड़ी व कोयले आदि के जलावन से कई हानिकारक तत्व हवा में घुलते हैं। ये मानव स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक माने जाते हैं। जैसे शीशे या लेड तथा उसके यौगिकों की उपस्थिति से मस्तिष्क व तंत्रिका तंत्र संबंधी रोग हो जाते हैं, जो मुख्यतः डीजल व पेट्रोलियम ईधनों के वाहनों के जरिए होता है। वाहनों में जीवाश्म ईंधन के उपयोग से टेट्रा एथिल लेड की सूक्ष्म कणिकाएं वायुमंडल में उत्सर्जित होती हैं, जो फेफडे में कैंसर का मुख्य कारण भी बनता है। इसके अलावा आर्सेनिक, कैडमियम और अन्य प्रदूषक पदार्थ श्वास और दिल संबंधी रोग जैसे दमा, स्ट्रोक आदि का कारण हैं।

बारीक प्रदूषित धूलकण यानी पर्टिकुलेट मैटर्स (Particulate Matters)

बेहद सूक्ष्म और स्थूल प्रदूषक तत्व व धूलकण जो हवा में प्रदूषण का कारण बनते हैं, उन्हें आम तौर पर दो नामों-पर्टिकुलेट मैटर 2.5  (PM2.5) और पीएम 10 (PM10) से जाना जाता है। वायु मंडल में इन प्रदूषित धूलकणों की मात्रा से हवा की गुणवत्ता का पता चलता है। जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानना है कि PM2.5 का स्तर 70 से 20 माइक्रोग्राम प्रति घन क्यूबिक मीटर तक कम हो तो वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में लगभग 15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है। हवा में मौजूद ये पर्टिकुलेट मैटर्स सांस द्वारा शरीर फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और इन जहरीले तत्वों से फेफड़े और दिल को क्षति पहुंचती है।

भारतीय मानकों के अनुसार PM2.5 का स्तर 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर होना चाहिए और PM10 के लिए 60 माइक्रोग्राम। लेकिन वायु प्रदूषण स्तर की समस्या भारत में इस कदर बढ़ती गई है कि PM2.5 के मानक विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 4 गुना ज्यादा है, वहीं PM10 के मानक तीन गुना ज्यादा है।

क्या है एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) और एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (Air Quality Life Index)

वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक ऐसा मापदंड है, जिसके जरिए यह आकलन किया जाता है कि वायु प्रदूषण के परिप्रेक्ष्य में हवा की क्वालिटी स्वच्छता और स्वास्थ्य की कसौटी पर कैसी है। दूसरे शब्दों में यह वायुमंडल में प्रदूषक तत्वों के स्तरों के आधार पर हवा की क्वालिटी की दशा व दिशा बताता है।

वहीं एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स (AQLI) यानी वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक दीर्घकालिक रूप से पर्टिकुलेट मैटर्स के संपक में रहने तथा उसका मानव जीवनकाल पर पड़ने वाले असर की गणना करता है। दूसरे शब्दों में यह सूचकांक यह संकेत करता है कि अगर वायु प्रदूषण का स्तर कम हो जाए तो औसत के मुकाबले लोगों की उम्र कितना बढ़ सकती है। जैसे भारत डब्ल्यूएचओ के मानकों के अनुसार वायु प्रदूषण घटाने पर ठोस प्रगति करे तो भारतीयों के जीवन में औसतन 4 वर्ष का इजाफा हो सकता है।

एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स दरअसल यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागों का एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट (Energy Policy Institute of Chicago-EPIC) तैयार करता है। एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स-2018 के अनुसार जीवाश्म ईंधनों से पैदा प्रदूषक तत्वों से पूरी दुनिया में जीवन प्रत्याशा (यानी Life Expectancy : जिसका मतलब है मानव के औसतन एक खास उम्र तक जीवित रहने की आशा) औसतन 1.8 वर्ष कम हो गयी है। इस रिपोर्ट का स्पष्ट निष्कर्ष है कि गंभीर होते वायु प्रदूषण के कारण जीवन प्रत्याशा में औसतन दो वर्ष की कमी टी.बी, एचआइवी एड्स, ध्रूमपान आदि रोगों से जीवनकाल में होने वाले नुकसान से कहीं ज्यादा है। अगर भारत की बात की जाए तो आकलन के मुताबिक पिछले दो दशकों में हवा में प्रदूषक तत्वों की मात्रा और लोगों के इसके लगातार संपर्क में आने से भारतीयों की जीवन प्रत्याशा 4.3 वर्ष कम हो गई है, जबकि 1998 में यह कमी 2.2 वर्ष आंकी गई थी। दिल्ली में भयावह प्रदूषण के स्तर को देखते हुए जीवन प्रत्याशा में 10 वर्ष की कमी आंकी गई है।

पढ़िए: खास स्टोरी भारतीय शहरों में जीवन प्रत्याशा में खतरनाक कमी का संकेत   (web link)

एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट ऑफ शिकागो (EPIC) की रिपोर्ट में देश के सबसे प्रदूषित जिलों के जो आंकड़े दिए हैं, वह भयावह संकट का संकेत करते हैं। देश में वायु प्रदूषण के मामले में सबसे खराब शहरों में दिल्ली के अतिरिक्त आगरा, बरेली, लखनऊ कानपुर, पटना जैसे शहर शामिल हैं। आकलन के मुताबिक देश के राष्ट्रीय मानकों का पालन करने पर इन जिलों के लोगों की उम्र 3.5 वर्ष से 6 वर्ष तक बढ़ सकती है।

LEAVE A REPLY