छत्तीसगढ़ के 13 गांवों ने पर्यावरण मंत्री को लिखा पत्र, 5 कोल ब्लॉकों की बोली से नाराज

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक छत्तीसगढ़ के 13 गांवों ने केंद्र सरकार को तमनार के पांच कोयला ब्लॉकों की निजी बोली लगाने की अनुमति देने के खिलाफ पत्र लिखा है। रायगढ़ जिले के इन गांवों के सरपंचों ने केंद्रीय पर्यावरण प्रकाश जावड़ेकर को लिखे पत्र में कहा है कि कोयला ब्लॉक संचालित करने का फैसला ग्राम सभा की भावना और फरवरी 2020 में दिए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ है।

केंद्र सरकार ने नीलामी से पहले 41 कोल ब्लॉक के साथ सूची में बदलाव किया था। 1 सितंबर को छत्तीसगढ़ सरकार और पर्यावरण के लिए काम करने वाले संगठनों के विरोध के बाद जैव विविधिता (बायोडायवर्सिटी) से समृद्ध हसदेव अरण्य क्षेत्र के पांच कोयला ब्लॉकों को तीन ब्लॉकों डोलसरा, जारेकेला और झारपालम-तंगारघाट से बदल दिया गया था। ये ब्लॉक दो अन्य के साथ रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में स्थित हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, इस इलाके में मौजूदा कोयला खदानों से प्रदूषण हूआ है और जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचा है। सरपंचों ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान और क्षेत्र के लोगों की गंभीर स्वास्थ्य दिक्कतें हो सकती हैं, इन कोयला ब्लॉक को शामिल करने का निर्णय एनजीटी के 27 फरवरी के आदेश का सीधा उल्लंघन है।

किसी ने हमसे पूछा तक नहीं : सरपंच

रायगढ़ निवासी शिवपाल भगत की याचिका पर एनजीटी ने आदेश दिया था कि मौजूदा कोल संयंत्रों के विस्तार की किसी भी योजना को गहन मूल्यांकन के बाद ही अनुमति दी जानी चाहिए। स्वास्थ्य चिंताओं का खास ख्याल रखा जाना चाहिए। ग्रामीणों और पर्यावरण संगठनों का कहना है कि ऐसा कोई मूल्यांकन नहीं किया गया। एक सरपंच ने कहा, ‘किसी ने हमसे नहीं पूछा तक नहीं। जो भी हुआ हमारी ग्राम सभा के फैसलों के खिलाफ है।’

कांग्रेस सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

सरपंचों ने कांग्रेस की अगुवाई वाली राज्य सरकार पर अपने घोषणा पत्र में किए गए वादों से पीछे हटने का भी आरोप लगाया है। 1 अगस्त को केंद्रीय कोयला और खनन मंत्री प्रहलाद जोशी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात की थी। बाद में संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि पांच ब्लॉकों को नीलामी सूची से बाहर रखा जाएगा और प्रदेश सरकार के सुझाव के अनुसार उनमें तीन को जोड़ा जाएगा।

सरकार का कहना है कि वाणिज्यिक कोयला खनन से राज्य को एक साल में कम से कम 4,400 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा और लगभग 60,000 नौकरियां पैदा होंगी। जबकि सच्चाई यह है कि मशीनीकरण की वजह से कोयला उद्योग में लगातार नौकरियां खत्म हो रही हैं।

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