बिहार में चुनाव के बीच हजारों आदिवासियों को क्यों बेघर करना चाह रही सरकार?

बिहार में चुनाव होने जा रहे हैं और आप दिनभर सिर्फ इससे जुड़ी ही खबरें देख-सुन पा रहे हैं। जबकि एक खबर है जिस पर मीडिया की और हमारी नजर जाना जरूरी है। यह मामला है बिहार के कैमूर जिले का जहां हजारों आदिवासी जल, जंगल, जमीन और अपने हक के लिए लड़ रहे हैं।

दरअसल, कैमूर मुक्ति मोर्चा के बैनर तले अधौरा में 10 और 11 सितंबर को प्रस्तावित बाघ अभ्यारण्य और वन सेंचुरी के खिलाफ दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। धरना-प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग थी कि उनके हित में जो कानून भारत सरकार ने बनाया है उसे कैमूर पठार में भी लागू किया जाए, जैसे पांचवी अनुसूची, पेशा अधिनियम 1996 या वन अधिकार अधिनियम 2006। लेकिन धरनास्थल पर प्रदर्शनकारियों से मिलने अंतिम दिन भी कोई अधिकारी नहीं आया।

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज

प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगो को मनवाने के लिए ब्लॉक कार्यालय और वन विभाग में ताला लगाया गया था। उसे भी स्थानीय दारोगा द्वारा बिना प्रदर्शनकारियों के अनुमति के तोड़ दिया गया। इससे जनता और उग्र हो गई और जब वो फिर से तालाबंदी करने गई तो पुलिस से झड़प हो गई। फिर सीआरपीएफ द्वारा लाठीचार्ज करने के बाद जनता ने जबाव में पुलिस पर हमला कर दिया।

 

कैमूर मुक्ति मोर्चा के अनुसार, ‘इसके बाद पुलिस ने गोली चलाना शुरू कर दिया जिसमें एक प्रदर्शनकारी का कान कट गया। अगर गोली सिर में लगी होती तो उनकी मौत भी हो सकती थी। इस विस्फोटक स्थिति के लिए यहां के असंवेदनशील अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं जो प्रदर्शनकारियों से मिलने तक नहीं आए। आज वही इस हिंसा के लिए प्रदर्शनकारियों को दोषी बता रहे हैं जबकि इसके दोषी वे खुद हैं।’ इस हिंसा में दोनों तरफ के लोग घायल हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ‘हम बाघ अभ्यारण्य के खिलाफ अधौरा मे शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन आंदोलन के दूसरे दिन भी हम से मिलने कोई अधिकारी नहीं आया। इससे गुस्सा कर जनता वन विभाग के ऑफिस मे ताला लगाने गई। जहां उसकी पुलिस से कहा-सुनी हो गई और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया तो जनता भी जवाब देने लगी। इसके बाद पुलिस गोली चला रही है और जनता भी डटी हुई है। हम तमाम जनवादी ताकतों और पत्रकारों से अपील करते है वे हमारे साथ खड़े हो और अधौरा आए।’

कैमूर मुक्ति मोर्चा के कई लोगों को उठा ले गई पुलिस

उन्होंने बताया कि ‘बाघ अभ्यारण्य और वन सेंचुरी के खिलाफ चल रहे हमारे आंदोलन को कुचलने के लिए बिहार सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। हमारे नेतृत्वकारी पांच साथियों को पुलिस पकड़कर आज विक्रमगंज थाने में ले गई है। इसके अलावा 10 और साथियों को पकड़ने के लिए पुलिस रात-दिन छापेमारी कर रही है। आसपास के सभी थानों से अतिरिक्त पुलिस के साथ सीआरपीएफ को भी बुलाया गया है। उनका सबसे ज्यादा जोर हमारे साथी विनोद शंकर को पकड़ने पर है।’

 

‘उनके गांव और घर पर दिन में दो-दो बार छापेमारी की जा रही है और उनके घरवालों को धमकी दी जा रही है। उन पर पुलिस जिस तरह गुस्सा है उसको देखते हुए लगता है कि उनके पकड़े जाने पर कुछ भी किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य साथियों के घरों पर भी लगातार छापेमारी की जा रही है। हम पूरे देश से आह्वान करते है कि अधौरा में चल रहे इस पुलिसिया दमन के खिलाफ आवाज उठाएं।’

ताजा जानकारी के मुताबिक, इस मामले में पुलिस ने 25 लोगों को नामजद किया है व 50 अज्ञात के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं, सात लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। इस बीच ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि इस इलाके में खनिज मिले हैं, जिसपर सरकार की नजर है और वह बाघ अभ्यारण्य के बहाने आदिवासियों के गांवों को खाली करवाने की कोशिश हो रही है।