कोरोना काल के बाद की ग्रीन रिकवरी योजनाओं की आवश्यकता को ग्रीनपीस इंडिया ने किया उजागर, अपनाया ये खास तरीका

भारत के 16 राज्यों के किसानों की मांग- कोरोना महामारी के बाद की रिकवरी योजनाओं के जरिए हो जलवायु-प्रूफ, समान, टिकाऊ और लचीले भारत का निर्माण।

कोरोना महामारी ने हमारे मौजूदा खाद्य प्रणालियों की सीमाओं और कमजोरियों को उजागर किया है। यह समय है कि हम अपने सिस्टम को मजबूत और फिर से तैयार करें। किसानों को न केवल उचित मूल्य के लिए संघर्ष करना पड़ता है बल्कि टूटी हुई आपूर्ति श्रृंखलाओं का खामियाजा भुगतना पड़ता है। लॉकडाउन के दौरान बाजारों की अनुपलब्धता ने प्रणाली में खामियां और टूट को दिखाया है। हम मानते हैं कि भविष्य के विकल्पों को समावेशी, समग्र और व्यापक व्यवस्थित परिवर्तनों को अग्रसर करना चाहिए जो हमें कोविड-19 से भी अधिक पर्यावरणीय, आर्थिक या स्वास्थ्य संकटों के लिए स्थिति-स्थापक और प्रतिक्रियाशील बनाते हैं। ग्रीनपीस इंडिया ने ओडिशा में स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर इस संबंध में मांग की है। ओडिशा के पुरी में गंगा देवी नदी पर ग्रीनपीस इंडिया ने स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर भारत के लोगों के लिए एक उत्साहजनक संदेश दिया है ताकि वे प्रतिज्ञा करें और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें।

ग्रीनपीस इंडिया किसानों और उपभोक्ताओं के लिए अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए एक मंच बना रहा है जो बेहतर रिकवरी के लिए उनकी आवाज को भी समर्थन देगा। दिल्ली-एनसीआर, बिहार, गुजरात, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, जम्मू और कश्मीर और असम जैसे भारत के 16 राज्यों के किसानों ने कोरोना महामारी के बाद के ग्रीन रिकवरी योजनाओं के रूप में स्थायी कृषि प्रथाओं की मांग की है जिनसे उत्पादकता में सुधार हो और पर्यावरण के साथ पारस्परिक रूप से लाभप्रद संबंध भी बना रहे।

ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर इश्तियाक अहमद कहते हैं, ”यह हमारी खाद्य प्रणालियों को अधिक लचीला, पारिस्थितिक रूप से टिकाऊ, सामाजिक रूप से न्यायसंगत और सुलभ बनाने की दिशा में हमारी योजना और निर्णयों को फिर से परिभाषित करने का समय है। हमें ऐसे समाधान खोजने और अनुसंधान करने की आवश्यकता है, जो कमजोर को सशक्त बनाने और जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता को कम करने और जलवायु परिवर्तन की तेजी से बढ़ती चुनौतियों को कम करने के लिए नवीकरण की दिशा में आगे बढ़ाए।”

कोविड-19 के बाद के रिकवरी योजनाओं के संबंध में ग्रीनपीस इंडिया की मांग है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि भविष्य की सभी योजनाएं जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को कम या फिर हल करती हो। हमें ऐसे समाधान खोजने और अनुसंधान करने की आवश्यकता है जो ऊर्जा की जरूरतों के लिए जीवाश्म ईंधन पर हमारी निर्भरता को कम करने की क्षमता रखता हो। पारिस्थितिकी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और रोजगार के विकेंद्रीकृत मॉडल को बढ़ावा देने की जरूरत है। कृषि के मोर्चे पर, हमारी नीतियों में छोटे और सीमांत किसानों को प्राकृतिक और पारिस्थितिक कृषि पद्धतियों की दिशा में लगातार कदम बढ़ाने के लिए कार्यक्रमों की परिकल्पना की जानी चाहिए। हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हमारी खाद्य प्रणाली न केवल खाद्य सुरक्षा बल्कि सभी के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने में सक्षम हो। भविष्य की योजना बनाते समय हमें यह याद रखना होगा कि मिट्टी, पौधों, जल निकायों, जानवरों, पर्यावरण और मनुष्यों का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है।

इश्तियाक आगे कहते हैं, ”इस महामारी के समाप्त होने पर एक संगठन और समाज के रूप में हमारी भविष्य की क्षमता को हमारे द्वारा चुने गए विकल्पों से परिभाषित किया जाएगा। हमारी जिम्मेदारियों को व्यक्तियों और उनकी लचीलेपन की कहानियों के साथ प्रगतिशील संभावनाओं के एक नए परिदृश्य से जोड़ना होगा। ग्रीनपीस इंडिया का मानना है कि कोविड-19 एक अनजाना विघटन है जो हमारे समाज का नेतृत्व कर रहा है, जो वर्तमान की तुलना में पहले से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है और भारत के लिए एक स्थायी और न्यायपूर्ण भविष्य की कल्पना करता है।”

सरकार को ऐसे हरे-भरे रिकवरी योजनाओं पर विचार करना चाहिए जो सामूहिक आशा, आत्मविश्वास और इस संकट को एक अवसर में बदलने का इरादा रखते हों। इसके साथ-साथ यह योजनाएं जलवायु-प्रमाण, समान, टिकाऊ और लचीला भारत बनाने के लिए मजबूती से दिशा निर्धारित करते हों।

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