जलवायु चिंता से निपटने में कारगर हैं ये उपाय

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यूपी के सांभल में एक 16 साल की बच्ची ने सुसाइड कर लिया। अपने सुसाइड नोट में उसने पॉल्यूशन, जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई, करप्शन वगैरह को अपनी सुसाइड का ट्रिगर प्वाइंट बताया है। हमारे बच्चों में क्लाईमेट एंजायटी बढ़ रही है। पूरी दुनिया में यह ट्रेंड देखा जा रहा है। मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट इस बात को नोटिस कर रहे हैं। खासकर, कम उम्र के लोगों में यह एंजायटी ज्यादा देखा जा रहा है।

यूके में हुए एक अध्ययन के अनुसार बाढ़ या तुफान जैसे जलवायु संकट की वजह से मानिसक स्वाथ्य संबंधी समस्याओं में 50% तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है.

हाल ही में एक हजार से ज्यादा क्लिनिकल साइको लॉजिस्ट ने एक ओपन लेटर लिखकर इस संकट की तरफ ध्यान खिंचने की कोशिश की है। उनके अनुसार जलवायु संकट की वजह से लोगों में एंजाईटी बढ़ रही है।

ऑक्सफोर्ड में क्लिनिकल साइको लॉजिस्ट डा पैट्रिक केनेडी विलियम्स नेक््ल द गार्जियन की एक रिपोर्ट में बताया कि अबतक वे सामान्य मेंटल हेल्थ की समस्याओं को ट्रिट करते आ रहे थे। लेकिन दो साल से उनके यहां ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी मदद लेने आ रहे हैं जो लगातार क्लाईमेट चेंज पर रिसर्च कर रहे हैं। उनके अनुसार क्लाईमेट चेंज पर काम करने वाले ये विशेषज्ञ निगेटिव लेकिन फैक्ट को जितना जानते हैं, उतनी ही इनकी बैचेनी बढ़ रही है।

दिक्कत है कि सरकार और सिस्टम इसको कंट्रोल करने के लिये गंभीर नहीं दिख रही है। क्लाईमेट एक्टिविस्ट और साइंसटिस्ट लगातार इसके प्रभाव को उजागर कर रहे हैं। मजबूरी है कि जलवायु परिवर्तन से जुड़े सारे ही फैक्ट निगेटिव हैं, इमोशनली ट्रिगर करते हैं और इनको पढ़कर हेल्पनेस भी होती है।

तो क्या रास्ता है?

प्रोफेसर पैट्रिक केनेडी के अनुसार क्लाईमेट एंजायटी को खत्म करने का वही उपाय है जो क्लाईमेट चेंज को खत्म करने का है। यानी कि एक्शन लेना। हालांकि क्लाईमेट चेंज से निपटने के लिये पूरी व्यवस्था में बदलाव जरुरी है, और सरकार और कंपनियों की नीतियों को बदलना भी जरुरी है। लेकिन जबतक यह नहीं होता है हमें  इंडिविजुअल एफर्ट लेने होंगे।

जो लोग सरकार और सिस्टम से उम्मीद खो चुके हैं, उन्हें खुद के स्तर पर ही कुछ करना चाहिये.

खुद के जीवनशैली को बदलना, कम से कम कंज्यूम करना, एनर्जी यूज कम करना, वेस्ट रिसाईकल करना, कार का इस्तेमाल कम करना, साइकल चलाना,वॉक पर जाना यह सब हम कर सकते हैं.

और अपनी छोटी से छोटी एफर्ट को सिलिब्रेट करना जरुरी है। उन कहानियों को दूसरों के साथ साझा करें..

एक कम्यूनिटी बनायें. और उम्मीद का साथ ना छोड़े

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