मेघालय जल नीति बनाने वाला पहला राज्य बना!

 

मेघालय संभवतः देश का पहला राज्य है, जो भविष्य में होने वाले पानी के संकट का आंकलन करते हुए एक जल नीति का मसौदा तैयार किया है। देश में पानी के भीषण संकट के बीच मेघालय राज्य ने जल नीति मसौदा को अपने कैबिनेट में मंजूरी दे दी है। जल नीति के ज़रिए मेघालय राज्य के सभी निवासियों को पीने का पानी , घरेलू ज़रूरतें,  स्वच्छता और आजीविका को बनायें रखने के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पानी प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

गौरतलब है कि भारत के एक तिहाई से ज़्यादा बड़े हिस्से में सूखे ने लोगों के जीवन और आजीविका को संकट में डाल दिया है, इसी बीच मेघालय राज्य मंत्रिमंडल ने बीते शुक्रवार की शाम को एक विस्तृत प्रस्तुति के बाद एक मसौदा जो जल नीति को लेकर तैयार किया गया था उसे मंजूरी दी साथ ही साथ मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने अपनी अध्यक्षता में एक बैठक कर जल नीति के मसौदे पर विस्तृत चर्चा भी की । 

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मेघालय के उप मुख्यमंत्री प्रस्टोन तिनसॉन्ग ने कहा, “जल नीति के सहारे सरकार, राज्य के सभी निवासियों को पीने लायक साफ़ पानी सुनिश्चित करने का काम करेगी साथ ही  हम घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी की उपलब्धता को और सुचारू ढंग से लागू करवाने काम काम करेंगे, आजीविका के विकास के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पानी प्रदान करने के लिए हम प्रतिबद्ध है”। टाइनसॉन्ग ने कहा, “जल नीति के द्वारा राज्य की जल संसाधनों को बेहतर ढंग से विकसित किया जाएगा, नीति हितधारकों के साथ मिलकर तैयार की गई थी और इसे हम जल्द ही औपचारिक रूप से अधिसूचित करेंगे।”

राज्य की सरकार जल नीति के सहारे आने वाले समय में राज्य के सभी जल स्रोतों के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण पर संगठित तरीके से जोर देगी और जल संरक्षण को सुनिश्चित करने का काम करेगी ताकि राज्य की जल स्रोतों की मात्रा और गुणवत्ता में लगातार हो रहे गिरावट को रोका जा सकेगा। इस मसौदे में पानी रीसाइकल और वाटर हार्वेस्टिंग की सुविधा को बेहतर करने का लक्ष्य हैं। जल नीति के लिए बने मौसौदे में अन्य बातों के अलावा, मसौदा राज्य जल नीति जो समुदाय को सक्रिय और संगठित रूप से शामिल करते हुए राज्य की तमाम जल संसाधनों के प्रबंधन की रक्षा और सुधार करना चाहती है, मसौदा यह भी बताती है कि राज्य की सभी भवन निर्माणों में छत पर वर्षा जल संचयन को अनिवार्य बनाया जाएगा, जबकि पारंपरिक जल संचयन संरचनाएं, स्प्रिंग्स और जल निकाय मरम्मत, नवीनीकरण और बहाली के लिए कार्यक्रमों के माध्यम से पुनर्जीवित और बढ़ावा दिया जाएगा।  

मेघालय सरकार ने राज्य की जल नीति के मसौदे को तैयार करने के लिए जर्मन अंतर्राष्ट्रीय सहयोग (GIZ) को दिया था। GIZ को इस महत्वपूर्ण नीति के निर्माण में तकनीकी भागीदार के रूप में शामिल किया गया था जो जल निकायों के संरक्षण से संबंधित है। पहले भी जर्मन एजेंसी ने कई देशों जल नीति के मौसौदें के निर्माण में काम किया हुआ हैं। 

जैसा कि मेघालय एक पहाड़ी राज्य है, इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जल नीति मसौदें में बारिश के पानी के संचयन को लेकर काफ़ी गंभीर कदम उठानें के लिए कई बातें सुझाई है,  बारिश का पानी एक घंटे के भीतर बांग्लादेश पहुंच जाता है और नीति में, विशेषज्ञों द्वारा किए जाने वाले विस्तृत शोध के आधार पर जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी इलाकें में चेक बांधों के निर्माण की आवश्यकता को बहुत महत्व दिया है। राज्य की सरकार चेक डैम के ज़रिए  यह देखना चाहती हैं कि प्रत्येक चेक डैम लोगों के लाभ के लिए बहुउद्देश्यीय जलाशय बन जाए। विभाग ने नीति में अम्लीय पानी और पानी में लोहे की उच्च सामग्री का भी ध्यान रखा है।

LEAVE A REPLY