अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव : ना-नुकुर के बावजूद जलवायु परिवर्तन न मानने वाले ट्रंप को याद आई साफ हवा

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जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिकों की चेतावनियों को खारिज कर चुके अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को साफ हवा याद आई है। कारण है एक दूसरी हवा जो इस वक़्त अमेरिका में उनके खिलाफ चल रही है।

3 नवंबर को अमेरिकी में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान होगा। चुनाव पूर्व रुझानों में ट्रंप अपने प्रतिद्वंदी डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडेन से काफी पीछे हैं।

बुधवार (30 सितंबर) को ओहायो के क्लीवलैंड में राष्ट्रपति पद के लिए ट्रंप और बाइडेन के बीच पहली डिबेट हुई। जो स्वास्थ्य, न्याय, नस्लीय भेदभाव और अर्थव्यवस्था होती हुई जलवायु परिवर्तन से भी गुजरी। डिबेट को होस्ट कर रहे फॉक्स न्यूज के क्रिस वॉलेस ने ट्रंप से पूछा कि क्या वो जलवायु परिवर्तन में यकीन करते हैं?

अपने आप में यह सवाल ही हास्यास्पद है लेकिन पूछना जरूरी था खासकर तब जब वह जलवायु परिवर्तन के कारणों पर शक जाहिर करते हुए इसे चीन द्वारा गढ़ा हुआ धोखा बता चुके हों। ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन को कोरी अफवाह बताते हुए जून, 2017 में अमेरिका को पेरिस जलवायु समझौते से बाहर कर लिया था।

वॉलेस के सवाल पर ट्रंप सीधा और साफ-साफ कुछ भी कहने से बचते दिखे। हालांकि उन्होंने कहा, ‘मुझे साफ पानी और साफ हवा चाहिए। हम इस सिलसिले में बेहतरीन काम कर रहे हैं।’

ट्रंप ने दावा किया कि वह ऐसा कारोबार को नुकसान पहुंचाए बिना कर रहे हैं। पिछले राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने कोयला उद्योग में उत्पादन को बढ़ाकर नौकरियां पैदा करने की बात कही थी।
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प्यू रिसर्च के सर्वे में निचले पायदान पर था यह मुद्दा


ग्लोबल वार्मिंग को अप्रत्याशित अटेंशन

अमेरिकी जंगलों में हर साल लगने वाली आग पर ट्रंप ने कहा कि इसके लिए हमें बेहतर फॉरेस्ट मैनेजमेंट की जरूरत है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि जंगलों में लग रही आग की एक बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है।

क्लाइमेट चेंज पर ट्रंप के नरम पड़ते रुख का नतीजा ऐसा रहा कि अमेरीकी मीडिया में कई जगह इस डिबेट ने इसी एंगल से सुर्खियां बटोरीं। साइंटिफिक अमेरिका ने लिखा, ‘पहली प्रेसिडेशियल डिबेट में जलवायु परिवर्तन को अप्रत्याशित अटेंशन।’

बेवसाइट ने लिखा कि ऐसा पूर्व की किसी भी प्रेसिडेंशियल डिबेट में देखने को नहीं मिला है। आखिरी बार साल 2000 की डिबेट में आलगोर से जलवायु परिवर्तन पर सीधा सवाल पूछा गया था।

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अपने पहले कार्यकाल में राष्ट्रपति ट्रंप ने कई ऐसे फैसले लिये जो जलवायु परिवर्तन से निपटने में रुकावट साबित होंगे। उन्होंने कोयला खनन को वैध बताया, पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को अलग करने का फैसला लिया, जिसकी खासी आलोचना हुई।

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