कोरोना संकटः जरुरी है सबके लिये पानी का अधिकार

COVID-19 ने पुरे विश्व को अपने आगोश में ले रखा है और भारत अछूता नहीं है | WHO ने जहां इस महामारी को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को बहुत जरुरी बताया है वहीँ बार-बार हाथों को धोना एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे इसका रोकथाम कई हद तक संभव है | 

सोशल डिटेन्सिंग को कारगर बनाने के लिए भारत सरकार ने २५ मार्च को पुरे भारत में लॉकडाउन की घोषणा की इस लॉकडाउन का मतलब यह है कि भारत के १३८ करोड़ नागरिक अपने अपने घरों से नहीं निकल सकते है और भारत सरकार ने उन्हें सभी जरुरी सामन मुहैया कराने का वादा किया है | 

लेकिन इस लॉकडाउन की वजह से हमारे देश में असमानता बहुत हद तक सामने आ गया है। लाखों मजदूरों के भूखे रहने की कहानी हर दिन आ ही रही है। इतना ही नहीें विश्व स्वाथ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार, दिन में कई बार अपने हाथों को साफ़ रखना, और कई बार पानी पीना जैसा लगने  वाला आसान कार्य , भारत के कई नागरिकों के लिए एक असंभव सा कार्य है| भारत में पानी की समस्या कोई नयी नहीं है |

 

वाटर ऐड की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पहले ही ७६ मिलियन नागरिक है जिनको साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है, और नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार तो आगे आने वाले समय में यह आंकड़ा ६०० मिलियन को छूने वाला है.

जहां २०१९ में भारत के भारत के प्रधांनमत्री ने वादा किया है की २०२४ तक भारत के हर व्यक्ति को ४३-५५ लीटर पानी उपलब्ध कराया जाएगा वहीँ अगर हर एक भारतीय कोरोना से बचने के लिए दिशा निर्देशिन का पालन करते हुए हाथ धोये तो उसे पुरे परिवार के लिए ६०-७० लीटर पानी सिर्फ हाथ धोने के लिए ही चाहिए होगा | 

सैनीटाइज़र की बढ़ती कालाबाजारी और बढ़ते दाम के कारण जहां एक तरफ ज्यादातर भारतीय ५००रूपये की आधा लीटर की सैनीटाइज़र  की बोतल नहीं खरीद सकते वो पानी की कमी के कारन अपने हाथ भी धो नहीं सकते | 

वैसे तो पानी की यह समस्या करीब करीब देशभर में हैं, पूरा भारत इस समस्या को झेल रहा है, देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं है, पिछले कुछ दिनों की रिपोर्ट पढ़े तो पता चलता है की लॉकडाउन के चलते दिल्ली में कई जगह पानी की  समस्या आ रही है | संगम विहार, अशोक नगर, आनंद विहार , मयूर विहार फसे-१, उत्तम नगर , एशियन खेल गाँव जैसे दिल्ली के ये वो इलाके है जहाँ दिल्लीवासी  पानी की समस्या झेल रहे है , और कठोर लॉकडाउन के चलते तो इनके पास पानी की समस्या से निजात पाने के लिए दिल्ली सरकार से गुहार करने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है |

यहाँ बात गौर करने वाली यह है कि २०१९ की गर्मी दिल्ली के लिए पानी का बहुत बड़ा संकट लायी थी , दिल्ली के संगम विहार जैसे कई इलाकों में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता सिर्फ ४०लीटर ही थी ,  आलम यह था कि भलसवा क्षेत्र की पुलिस चौकी में आने वाली पुलिस कंप्लेंटस में ५०% शिकायतें सिर्फ पानी के कारण होने वाले झगड़ों से सम्बंधित थी |

पानी की समस्या से प्रभावित क्षेत्रों में लोगो को अपनी जरुरत पूरा करने के लिए पानी के टैंकरों की ४०% बढ़ी हुई कीमतें अदा करनी पड़ी  और यह कीमतें भी साफ़ पानी की गारंटी नहीं थी, दूषित पानी की उपलब्धता से भलसवा के २ लाख से ज्यादा लोगों को जॉन्डिस, हेपिटाइटस और लिवर से सम्बंधित जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा था | 

नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, २०२० में दिल्ली के अंडरग्राउंड जल की उपलब्धता लगभग समाप्ती के कगार पर होगी, पंजाब और राजस्थान के बाद दिल्ली का नंबर उस सूची में ३ नंबर पर आता है जो यह बताती है की कौन-कौन से राज्य अपने भूजल का अत्यधिक दोहन करते है | सरकार की माने तो दिल्ली के ५६% से ज्यादा पानी के स्रोत  अत्यधिक दोहन का खामियाजा भुगत रहे है | २०१ १ का जनगणना के अनुसार, दिल्ली के सीमा क्षेत्र में ४.५ लाख से ज्यादा टूबवेल या बोरवेल है जिसमे ज्यादातर अवैध है |  

दिल्ली सरकार इस समय, कोरोना से लड़ाई में प्रतिबद्ध है और हर संभव कदम उठा रही है , लेकिन जब दिल्ली २०१९ में पानी की उपलब्धता से हर नागरिक को झूझना पड़ा , तो २०२० में कोरोना के कहर के सामने भी यहीं समस्या जनता को रोजाना दो-चार होना पड़ रहा है, और वो इसके लिए सरकार पर पूर्ण रूप से आश्रित है | लेकिन गंभीर प्रश्न यह यह है की २०१९ से सीख कर इस साल के लिए सरकार की तैयारी कैसी है ?

गर्मियों का मौसम आ चुका है, और २०२० में सरकार को सिर्फ कोरोना के समय पानी की उपलब्धता ही नहीं, पुरी गर्मी के मौसम के दौरान पानी को हर व्यक्ति को उपलब्ध करवाना होगा | 

लेकिन फिलहाल इसकी तैयारी नहीं नजर आ रही है। कोरोना से लड़ना महत्वपूर्ण है लेकिन इस लड़ाई में जरुरी है कि हम सबके लिये भोजन, साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित कर सकें।

 

(लेखक लंबे समय से पर्यावरण कार्यकर्ता हैं और फिलहाल दिल्ली स्थित समाजिक परिवर्तन के लिये काम कर रही संस्था हैया के साथ जुड़े हैं।)

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